सन्दर्भ: भारत को ईरान के साथ अपने संबंधों को अमेरिकी विदेश नीति में होने वाले बदलावों के अनुरूप नहीं बनाना चाहिए।

यह लेख क्यों?
संबंधित तथ्य:
ईरान में चाबहार के जीवंत शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह के माध्यम से आईएनएसटीसी एक मल्टी मोडल लॉजिस्टिक कॉरिडोर का उपयोग करके दो बाजारों को जोड़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत युक्तिसंगत होगी, जो दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार की मात्रा में योगदान देगा।
पृष्ठभूमि:
2018 में परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने और ईरान पर प्रतिबंधों को फिर से लागू करने से भारत के तेहरान के साथ निरंतर सहयोग पर सवाल उठे। लेकिन भारत अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट पाने में कामयाब रहा, जिससे उसे तदर्थ उपायों के माध्यम से बंदरगाह का संचालन करने की अनुमति मिल गई।
भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व
इस सन्दर्भ में अमेरिका की प्रतिक्रिया:
आगे की राह
भारत ने अतीत में वाशिंगटन डीसी में नीतिगत बदलावों के आधार पर ईरान के साथ अपने जुड़ाव में यू-टर्न लिया था। उसे अब ऐसा नहीं करना चाहिए। उसे चाबहार में निवेश करना जारी रखना चाहिए और मध्य एशिया के साथ अपने व्यापार और संपर्क परियोजनाओं को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए, जो भारत के निरंतर विकास के लिए आवश्यक है।
महत्वपूर्ण तथ्य
अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (NSTC)- यह लगभग 7,200 किमी लंबा मल्टी-मोडल परिवहन गलियारा है जो सड़क, रेल और समुद्री मार्गों के माध्यम से सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) को मुंबई से जोड़ता है।