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Stay invested: On Chabahar and India-Iran ties (The Hindu)

सन्दर्भ: भारत को ईरान के साथ अपने संबंधों को अमेरिकी विदेश नीति में होने वाले बदलावों के अनुरूप नहीं बनाना चाहिए।

यह लेख क्यों?

  • पश्चिम एशिया में तनाव के बावजूद भारत ने चाबहार बंदरगाह को विकसित और संचालित करने के लिए ईरान के साथ 10 वर्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किये। 
  • इस समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत, इस्लामी गणराज्य के साथ अपने बुनियादी ढांचे और व्यापार साझेदारी को अगले स्तर पर ले आया है। 
  • इस महत्वपूर्ण समझौते के बाद अब ईरान का चाबहार बंदरगाह अगले दस वर्षों तक भारत का हो गया है।

संबंधित तथ्य:  

  • यह कॉन्ट्रैक्ट इंडिया पोर्ट ग्लोबल लिमिटेड (IPGL) और ईरान के बंदरगाह और समुद्री संगठन (Ports and Maritime Organization) के बीच हस्ताक्षरित किया गया।
  • भारत चाबहार के शाहिद बेहेस्ती बंदरगाह और संबंधित परियोजनाओं में अपने द्वारा संचालित टर्मिनल को और विकसित करने के लिए 120 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा और 250 मिलियन डॉलर की ऋण सुविधा प्रदान करेगा। 

ईरान में चाबहार के जीवंत शाहिद बेहेश्ती बंदरगाह के माध्यम से आईएनएसटीसी एक मल्टी मोडल लॉजिस्टिक कॉरिडोर का उपयोग करके दो बाजारों को जोड़ेगा, जिससे लॉजिस्टिक लागत युक्तिसंगत होगी, जो दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापार की मात्रा में योगदान देगा।

पृष्ठभूमि:

  • 2003 में परिकल्पित, चाबहार परियोजना अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र द्वारा तेहरान पर उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर प्रतिबंध लगाने के बाद वर्षों तक शुरू नहीं हुई। 

2018 में परमाणु समझौते से अमेरिका के हटने और ईरान पर प्रतिबंधों को फिर से लागू करने से भारत के तेहरान के साथ निरंतर सहयोग पर सवाल उठे। लेकिन भारत अमेरिकी प्रतिबंधों से छूट पाने में कामयाब रहा, जिससे उसे तदर्थ उपायों के माध्यम से बंदरगाह का संचालन करने की अनुमति मिल गई।

 

भारत के लिए चाबहार बंदरगाह का महत्व

  • कनेक्टिविटी: चाबहार बंदरगाह भारत की कनेक्टिविटी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। चाबहार बंदरगाह समृद्ध मध्य एशियाई क्षेत्र को दक्षिण एशियाई बाजारों से जोड़ता है। यह व्यापार, आर्थिक सहयोग और दो भौगोलिक क्षेत्रों के बीच लोगों को जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण के रूप में उभरा है।
  • वैकल्पिक मार्ग: पाकिस्तान में बिना प्रवेश के अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए एक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है, जिससे मध्य एशिया के साथ बेहतर व्यापार संभव हो पाता है। 
  • सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंध: मध्य एशियाई बाजारों की संभावना के कारण, भारत की अगुवाई में आपस में जुड़ने से मध्‍य एशियाई देशों की हिन्‍द महासागर क्षेत्र में पहुंच को सुरक्षित और वाणिज्यिक दृष्टि से व्‍यवहार्य बना दिया है। यह सम्‍पर्क न केवल आपस में सम्‍पर्क प्रदान करेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का आगे बढ़ाते हुए निवेश को भी आगे बढ़ाएगा।
  • अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा: चाबहार को अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (NSTC) से जोड़े जाने की उम्मीद है, जो भारत को ईरान, अजरबैजान और रूस के माध्यम से यूरोप के करीब लाएगा। 
    • स्वेज मार्ग के विकल्प के रूप में, एक पूरी तरह से चालू NSTC अंतरमहाद्वीपीय व्यापार पर खर्च होने वाले समय और धन को कम करेगा। 
  • भू-राजनीतिक प्रभाव: चीन के BRI के हिस्से के रूप में पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से लगभग 200 किमी दूर स्थित चाबहार बंदरगाह भारत को मध्य एशिया में अपने भू-राजनीतिक प्रभाव का विस्तार करने में भी मदद करेगा।

इस सन्दर्भ में अमेरिका की प्रतिक्रिया:

  • 2018 में, जब अमेरिकी सेना अफगानिस्तान में इस्लामिक रिपब्लिक सरकार का समर्थन कर रही थी, तो उसने भारत को प्रतिबंधों से छूट दी थी क्योंकि काबुल को भी बंदरगाह परियोजना से लाभ मिलने वाला था।
  • ईरान के अमित्रतापूर्ण समबन्धों के कारण अमेरिका ने इस परियोजना के बारे में संकीर्ण दृष्टिकोण अपनाते हुए अमेरिका ने ईरान के साथ लेनदेन पर संभावित प्रतिबंधों की चेतावनी दी है। 
  • अमेरिकी सेना की अफगानिस्तान से वापसी एवं तालिबान के सत्ता में आने साथ ही अमेरिका का ध्यान ईरान को नियंत्रित करने पर है।

आगे की राह

भारत ने अतीत में वाशिंगटन डीसी में नीतिगत बदलावों के आधार पर ईरान के साथ अपने जुड़ाव में यू-टर्न लिया था। उसे अब ऐसा नहीं करना चाहिए। उसे चाबहार में निवेश करना जारी रखना चाहिए और मध्य एशिया के साथ अपने व्यापार और संपर्क परियोजनाओं को बेहतर बनाने की कोशिश करनी चाहिए, जो भारत के निरंतर विकास के लिए आवश्यक है।

महत्वपूर्ण तथ्य

  • चाबहार ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में एक गहरे पानी का बंदरगाह है। यह ईरानी बंदरगाह है जो भारत के सबसे निकट है और खुले समुद्र में अवस्थित है। यह बंदरगाह बड़े मालवाहक जहाजों के लिए सुगम और सुरक्षित पहुंच प्रदान करता है।
  • जनवरी 2003 में, राष्ट्रपति खातमी और तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रणनीतिक सहयोग के एक महत्वाकांक्षी रोडमैप पर हस्ताक्षर किए। जिन प्रमुख परियोजनाओं पर दोनों देश सहमत हुए उनमें चाबहार भी शामिल है।
  • चाबहार बंदरगाह से सम्बंधित समझौते पर भारत ने ईरान के साथ 2015 में हस्ताक्षर किये थे।
  • चाबहार बंदरगाह में वस्तुतः ‘शाहिद कलंतरी’ और ‘शाहिद बेहेश्ती’ नामक दो अलग-अलग बंदरगाह सम्मिलित

अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (NSTC)- यह लगभग 7,200 किमी लंबा मल्टी-मोडल परिवहन गलियारा है जो सड़क, रेल और समुद्री मार्गों के माध्यम से सेंट पीटर्सबर्ग (रूस) को मुंबई से जोड़ता है।

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